नारद मोह लीला ने दिया अहंकार त्यागने का संदेश, श्रवण कुमार की लीला ने किया भावविभोर

रायवाला। प्रतीतनगर गांव के वार्ड नंबर 6 स्थित श्री रामलीला चौक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में लोक कल्याण समिति (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्री रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अनुपम संगम देखने को मिला। बुधवार को महोत्सव के दौरान विष्णु-लक्ष्मी पूजन, शिव-पार्वती संवाद एवं गणेश पूजन, नारद मोह और श्रवण कुमार लीला सहित चार प्रमुख प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने उपस्थित रामभक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता एवं श्री रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक विरेन्द्र नौटियाल ने बताया कि दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतीतनगर के ग्राम प्रधान राजेश जुगलान और रायवाला के ग्राम प्रधान सागर गिरि ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर दोनों अतिथियों ने ग्रामवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्री रामलीला महोत्सव का आनंद लेने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की। कार्यक्रम में भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को श्रीराम कथा सुनाने के प्रसंग का भी भावपूर्ण मंचन किया गया। नारद मोह लीला में देवर्षि नारद की तपस्या, इंद्र के सिंहासन के डोलने, कामदेव द्वारा उनकी तपस्या भंग करने के प्रयास तथा नारद मुनि के मन में उत्पन्न अहंकार का सजीव चित्रण किया गया। कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद मुनि के मन में अभिमान उत्पन्न हो जाता है। अपने परम भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु लीला रचते हैं।
विश्वमोहिनी के स्वयंवर में उनके रूप पर मोहित होकर नारद मुनि भगवान विष्णु से सुंदर रूप प्रदान करने का आग्रह करते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर का स्वरूप प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर सभा में उपहास का पात्र बनने और विश्वमोहिनी का वरण भगवान विष्णु द्वारा किए जाने से क्रोधित नारद मुनि उन्हें नारी-वियोग का शाप दे देते हैं। साथ ही, वे यह भी कहते हैं कि भविष्य में वानर ही उनकी सहायता करेंगे। बाद में नारद मुनि को अपनी भूल का एहसास होता है। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को संदेश दिया कि अहंकार व्यक्ति के विवेक को प्रभावित करता है, जबकि विनम्रता और आत्मबोध जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। महोत्सव के दूसरे दिन श्रवण कुमार की लीला का भी भावपूर्ण मंचन किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से माता-पिता के प्रति सेवा, समर्पण, सम्मान और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला ने भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा और उनके प्रति संतान के दायित्वों के महत्व को रेखांकित किया। वजी कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों का दिल जीता है। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों में कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। गोपाल दत्त सेमवाल ने भगवान शिव, प्रिंस ने माता पार्वती, आयुष ने गणेश, गंगाधर गौड़ ने श्रीहरि विष्णु, नित्यानन्द भट्टराई ने नारद और सन्नि ने इंद्र की भूमिका निभाई। वहीं, पार्थ, गौरव, महेश और समर ने देवगण, कृष्णा ने कामदेव, सुभाष गैरोला ने दशरथ एवं शीलनिधि, भगत सिंह ने गुरु वशिष्ठ, तीरथ सिंह ने मंत्री, विजय शर्मा ने श्रवण कुमार, समर ने शांतनु, सौरभ ने ज्ञानवंती और मनोज कंडवाल ने जय की भूमिका निभाई। सभी कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। मंचन के दौरान दर्शकों ने उत्साहपूर्वक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। राधा रसिक कीर्तन मंडली को सम्मानित किया है । रामलीला का भव्य मंचन देखने पहुंची राधा रसिक कीर्तन मंडली को लोक कल्याण समिति की ओर से राम दरबार की माला एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और सैकड़ों रामभक्तों ने पूरे उत्साह के साथ लीला का आनंद लिया और आयोजन की सराहना की।लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज में मर्यादा, भक्ति, सेवा और सदाचार के मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में सार्थक प्रयास कर रहा है ।

मौके पर लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी, प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल , महिला कल्याण सचिव अंजु बड़ोला तथा समिति के सदस्य राजेन्द्र प्रसाद रतूड़ी, नवीन चमोली, राम सिंह और आशीष सेमवाल उपस्थित रहे।
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