भारत को अमेरिकी निर्मित ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों लगाना चाहिए : पंकज भट्ट

ऋषिकेश ( राव शहजाद ) । भाजपा नेता पंकज भट्ट ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आज का युग केवल हथियारों और सेनाओं का नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और डिजिटल नियंत्रण का युग है। जिस देश के पास दूसरे देशों के नागरिकों का डेटा होता है, वही देश वास्तविक अर्थों में वैश्विक शक्ति बन जाता है। दुर्भाग्यवश, भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के करोड़ों नागरिकों का निजी डेटा आज भी अमेरिकी निर्मित ऐप्स—जैसे व्हाट्सऐप, गूगल मैप, फेसबुक और इंस्टाग्राम—के सर्वरों पर संग्रहीत है, जो एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है। पंकज भट्ट ने कहा कि आज डेटा केवल विज्ञापन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक हस्तक्षेप और जासूसी का नया हथियार बन चुका है। अमेरिकी टेक कंपनियाँ अपने देश के कानूनों के अधीन कार्य करती हैं, जहाँ आवश्यकता पड़ने पर सरकार इन कंपनियों को डेटा साझा करने के लिए बाध्य कर सकती है। ऐसे में भारतीय नागरिकों की लोकेशन, संपर्क, निजी बातचीत और डिजिटल आदतें विदेशी शक्तियों के हाथ में होना भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आरोप सामने आते रहे हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और लोकेशन आधारित ऐप्स के माध्यम से वेनेजुएला के राष्ट्रपति से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई और बाद में सत्ता परिवर्तन व अपहरण जैसे प्रयास किए गए। भले ही इन घटनाओं पर वैश्विक मतभेद हों, लेकिन यह निर्विवाद है कि डिजिटल निगरानी आज भू-राजनीति का एक प्रभावी हथियार बन चुकी है। पंकज भट्ट ने चेतावनी देते हुए कहा जो तकनीक आज हमें सुविधा देती है, वही तकनीक कल किसी देश को नियंत्रित करने का माध्यम भी बन सकती है। भारत को इस वास्तविकता को समय रहते समझना होगा। उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप के माध्यम से निजी, व्यावसायिक और राजनीतिक संवाद; गूगल मैप के जरिए रियल-टाइम लोकेशन और संवेदनशील स्थानों की जानकारी; तथा फेसबुक-इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जनभावनाओं का विश्लेषण, चुनावी हस्तक्षेप और मानसिक प्रोफाइलिंग संभव है। इससे भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सामरिक ढांचे की गहरी जानकारी विदेशी कंपनियों को मिलती है। समाधान प्रस्तुत करते हुए पंकज भट्ट ने कहा कि भारत के पास प्रतिभा और तकनीकी क्षमता की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्हाट्सऐप के स्थान पर स्वदेशी मैसेजिंग ऐप्स को बढ़ावा दिया जाए, गूगल मैप के विकल्प के रूप में NavIC आधारित भारतीय नेविगेशन सिस्टम विकसित किया जाए,और सोशल मीडिया के लिए भारत-नियंत्रित प्लेटफॉर्म हों, जिनका डेटा पूरी तरह भारत में ही सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ठान ले, तो अगले 2–3 वर्षों में भारत पूर्ण रूप से डिजिटल आत्मनिर्भर बन सकता है। पंकज भट्ट ने कहा जैसे हमने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं, वैसे ही अब समय आ गया है कि हम डिजिटल गुलामी से भी मुक्त हों। विदेशी ऐप्स पर निर्भरता केवल सुविधा नहीं, बल्कि हमारी संप्रभुता से समझौता है।

उन्होंने मांग की कि भारत को चरणबद्ध तरीके से अमेरिकी निर्मित ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए और स्वदेशी विकल्पों को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि यह कदम केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा, स्वतंत्रता और भविष्य से जुड़ा हुआ है। डिजिटल आज़ादी ही वास्तविक आज़ादी है। अब समय है कि भारत अपने नागरिकों के डेटा की रक्षा स्वयं करे ।








