हिमालय दिवस पर हिमालय: सतत् विकास चुनोतियां व समाधान विषय पर विचार गोष्ठी की आयोजित

देहरादून ( राव शहजाद ) । हिमालय सतत् विकास चुनोतियां व समाधान गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि ऋतु खण्डूडी भूषण अध्यक्ष उत्तराखंड विधानसभा व विशिष्ट अतिथि डा० कृपा नोटियाल, अतरिक्त महानिदेशक भारतीय तटरक्षक दल, हिमालयकी वाडिया भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ आर०जे० पैरुमल व प्राचार्या प्रो० ममता सिंह द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । एम०के०पी०(पी०जी०) कालेज की छात्राओं द्वारा पोस्टर प्रिंटिंग का निरीक्षण मुख्य अतिथि ऋतु खण्डूडी भूषण ने किया , तत्पश्चात राष्ट्र गीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । सर्वप्रथम महाविद्यालय की प्रोफेसर मीनाक्षी शर्मा द्वारा सभी अतिथियों के आगमन पर स्वागत भाषण प्रस्तुत किया । वही उत्तरांचल उत्थान परिषद के महामंत्री राजेश थपलियाल ने सभी अथियों का स्वागत किया परिषद की स्थापना के मूल भाव पर प्रकाश डालने साथ ही हिमालय के प्रति हमारा दृष्टिकोण व हिमालय के साथ जिम्मेदारी से कैसे रह सकते जा सकता है। गोष्ठी संयोजक प्रो०डी०डी०चोनियाल हिमालय : सतत् विकास चुनोतियां एवं समाधान विचार गोष्ठी की भूमिका व प्रस्तावना प्रस्तुत की व पावर प्रेजेन्टेशन के माध्यम से हिमालय की अध्यतन वास्तविकता उसका उदभव व समस्या व समाधान विषय को प्रस्तुत किया मुख्य वक्ता विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि हिमालय में रहने वाले लोगों की क्या समस्या है , उनके लिए किस प्रकार की नितियां बनायी जा सकती है । हिमालय में रहने वाले लोगों व विकास के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है अन्त श्रीमती खण्डूडी ने कहा कि हिमालय में पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए बड़ा सोचो बडा़ करो के साथ ही हमें अपने परम्परागत संस्कृति, जीवनशैली को पुनः अपनाने की आवश्यकता है । खण्डूडी ने कहा कि हिमालय पृथ्वी का मेरुदण्ड सभ्यता व संस्कृति का आधार स्तम्भ है । डा०कृपा नोटियाल अतरिक्त महानिदेशक भारतीय तटरक्षक दल ने अपने उद्बोधन में कहा कि उत्तरांचल उत्थान परिषद का यह कार्य सहरानीय है संस्था हिमालय के प्रति समाज में निरन्तर क्रियाशील है जिसकी महत्वपूर्ण आवश्यकता आज समाज को भी है नोटियाल ने कहा भी कहा कि सुरक्षा के मध्य नजर हिमालय प्रहरी के रूप में हमारा सुरक्षा कवच है । सीमांत गांव से पलायन सीमा सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है जिसकी हमें नितान्त चिन्ता करने की आवश्यकता है ।हिमालयी वाडिया भू- विज्ञान संस्थान वैज्ञानिक डॉ आर०जे० पैरुमल ने हिमालय क्षेत्र में भूकंप तिव्रता सम्भावित स्थान व उसकी व्यापकता का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की प्रस्तुत किया ।
हिमालय दिवस पर पी०जी०कालेज की छात्राओं को भी हिमालय : सतत विकास चुनोतियां व समाधान विषय पर अपने विचार प्रकट किये साथ ही पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छात्राओं को पुरस्कार व प्रमाण पत्र अध्यक्ष विधानसभा ऋतु खण्डूडी ने प्रदान किये । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही एम०के०पी०(पी०जी०) की प्राचार्या प्रो०ममता सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिमालय केवल निर्जीव पर्वत नहीं बल्कि ये मानव के विकास का प्रतीक है । हिमालय में विकास की योजनाओं पर कार्य करने से पूर्व उसकी पर्यावरणीय क्षति , वहां के समाज पर पड़ने वाला प्रभाव व वाह्य व आंतरिक वातावरण की विषय विशेषज्ञों से विस्तृत रिपोर्ट के साथ ही स्थानीय समाज की भी उसमें सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है । तभी हम हिमालय के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभा सकते है ।
कार्यक्रम के अन्त में डा० नीतू त्रिपाठी ने सभी अथियों का धन्यवाद किया ।

कार्यक्रम में उत्तरांचल उत्थान परिषद के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य नरेश चन्द्र कुलाश्री , डी०एन०उनियाल , विपुल जोशी , पर्यावरणविद् जगदीश बाबला, डा०कुसम नोटियाल, ऊषा रावत , डा०निता कुकरेती, राजकुमार टोंक , चरण सिंह कण्डारी अन्य उपस्थित रहे ।
[banner id="1202"]








































