सीता जन्म, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार की लीला का हुआ भव्य मंचन

रायवाला ( राव शहजाद ) । रायवाला में लोक कल्याण समिति (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्री रामलीला महोत्सव के चतुर्थ दिवस तीन प्रमुख लीलाओं—सीता जन्म, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार—का भव्य मंचन किया गया। शुक्रवार रात्रि आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्री रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि रामलीला मंचन का सिलसिला निरंतर आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार की रात मंचित तीनों लीलाओं में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। लीला के प्रथम दृश्य में राजा जनक के राज्य में अकाल पड़ने का प्रसंग दिखाया गया। ऋषियों ने समस्या के समाधान के लिए राजा जनक को अपनी पत्नी के साथ खेत में हल चलाने की सलाह दी। राजा जनक और उनकी पत्नी जब खेत में हल चला रहे थे, तभी एक घड़े से माता सीता प्रकट हुईं। राजा जनक उन्हें राजमहल ले आए और अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण करने लगे। दूसरे दृश्य में ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों द्वारा बाधा डालने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। राक्षसों के अत्याचारों से परेशान होकर ऋषि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से राम एवं लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया। राजा दशरथ ने पहले स्वयं साथ चलने की बात कही, लेकिन ऋषि विश्वामित्र के आग्रह और क्रोध को देखते हुए उन्होंने राम-लक्ष्मण को उनके साथ भेज दिया। मार्ग में भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध किया। इसके बाद उन्होंने सुबाहु सहित अन्य राक्षसों का भी संहार किया। इस प्रसंग का मंचन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है । तीसरे दृश्य में जनकपुर जाते समय भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और ऋषि विश्वामित्र के आश्रम के समीप पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। आश्रम को सुनसान देखकर श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र से उसके बारे में पूछा। इस पर ऋषि विश्वामित्र ने देवी अहिल्या की कथा सुनाई और उनका उद्धार करने को कहा। भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से देवी अहिल्या पुनः अपने मूल स्वरूप में लौट आईं। इस भावपूर्ण दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला में विभिन्न पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों में श्रीराम की भूमिका में पार्थ, लक्ष्मण की भूमिका में कृष्णा, राजा जनक की भूमिका में राजेन्द्र रतूड़ी, सुनैना की भूमिका में सौरभ कंडारी, सदानन्द की भूमिका में राजेश जुगलान, किसान की भूमिका में सूरज चमोली तथा सन्नी, समर और अर्जुन शामिल रहे। इसके अलावा मारीच की भूमिका विरेन्द्र सिंह, सुबाहु की भूमिका धीरज सिंह, राक्षसों की भूमिका पाखी, प्रियंशु और अजय, ऋषि विश्वामित्र की भूमिका नरेश थपलियाल, राजा दशरथ की भूमिका प्रदीप अरोड़ा, गुरु वशिष्ठ की भूमिका भगत सिंह, द्वारपाल की भूमिका तीरथ सिंह, ताड़का की भूमिका रोहित (धमाका) तथा देवी अहिल्या की भूमिका सृष्टि पंवार ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। रामलीला का भव्य मंचन देखने पहुंचे श्री भगवती प्रसाद गौड़, बीना गौड़, कबीर बंसल एवं हरितालिका तीज कमेटी के प्रतिनिधियों को लोक कल्याण समिति की ओर से राम दरबार की माला एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों सहित सैकड़ों रामभक्तों ने रामलीला का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित यह रामलीला महोत्सव क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

मौके पर लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी तथा प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल उपस्थित रहे।
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