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अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का छठवें दिन उत्तराखंड की दिव्य प्रकृति, संस्कृति, मिलट्स सहित अन्यों को समर्पित

 

ऋषिकेश ( राव शहजाद ) ।अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के माध्यम से स्वामी चिदानन्द सरस्वती भारत की प्राचीन विधा ध्यान व योग के साथ भारतीय संस्कृति, दर्शन, संस्कार, आध्यात्मिकता से साधकों और योगियों को जुड़ने व जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड की शान्ति, संस्कृति और ध्यान (मेडिटेशन) की विलक्षण परम्परा को आत्मसात करने के लिए प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रतिभागियों, योग जिज्ञासुओं और योगाचार्यो को महर्षि महेश योगी आश्रम, (बीटल्स आश्रम) का दर्शन व भ्रमण कराते हैं ताकि इस दिव्य भूमि की दिव्यता, जागृति और जीवंतता को सभी आत्मसात कर सके। साथ ही साधना से युक्त इस दिव्य भूमि की महिमा और महत्ता आज की युवा पीढ़ी को भी जान सके। महर्षि महेश योगी आश्रम में स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में ऊँ और वेद मंत्रों के दिव्य नाद के साथ सभी योग साधक ध्यान में लीन हो गये। सभी इस दिव्य ऐतिहासिक आश्रम की पवित्र ऊर्जा में डूब गए। ऐसा लग रहा था जैसे ध्यान का यह अद्भुत अनुभव उन्हें पहली बार हो रहा हो। स्वामी ने योगियों को बताया कि महान संत महर्षि महेश योगी जी की यह तपस्थली है। उन्होंने इस दिव्य भूमि पर ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन अर्थात मौन ध्यान की एक विलक्षण पद्धति विकसित की। वह स्वयं भी ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन सिखाते थे और उसका अभ्यास भी कराते थे जिससे अनेकों के जीवन में अद्भुत परिवर्तन हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि ध्यान से तात्पर्य मानसिक अशुद्धियों का पूर्ण उन्मूलन और उनसे पूर्ण मुक्ति के बाद की खुशी; शान्ति और आन्तरिक समृद्धि से है। ध्यान हमें जीवन की वास्तविकता से भागना नहीं बल्कि उनका सामना करना सिखाता है साथ ही जीवन की वास्तविकता को उसके वास्तविक रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। अगर जीवन को उसके वास्तविक रूप में स्वीकार किया जाए तो न तनाव होगा न ही हम जीवन बोझ लगेगा इसलिए जीवन में ध्यान को अवश्य स्थान प्रदान करे।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि हम सभी एक वैश्विक योगी परिवर के सदस्य है। हम एक परिवार हैं इसलिए हम सभी को मिलकर इस धरती की देखभाल करना होगा। उन्होंने कहा कि “अगर हमारे परिवार का कोई सदस्य खुश नहीं है, तो हम भी खुश नहीं रह सकते उसी तरह हमारी धरती पीड़ित है; प्रदूषित है तो हम कैसे जश्न मना सकते हैं। हमें पहले अपनी धरती का ख्याल रखना होगा। हमें धरती का राजदूत बनना होगा और एक हरित योगदूत बनना होगा। सभी प्रतिभागियों को ध्यान के पश्चात साध्वी भगवती सरस्वती ने प्रकृति से जुड़ने का संदेश देते हुये पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया तत्पश्चात वैश्विक योगी परिवार ने स्वामी जी और साध्वी जी के पावन सान्निध्य में रूद्राक्ष के पांच पौधों का रोपण किया।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के छटवे दिन की शुरुआत सुबह 6 बजे योगाचार्य डॉ. विश्वकेतु द्वारा प्राणायाम के अभ्यास से हुआ। योगाचार्य विश्वकेतु अखंड योग के संस्थापक, और एक लेखक भी हैं। ताई ची, अष्टांग योग और मार्शल आर्ट्स के मास्टर सेंसेई संदीप देसाई एक मूल चेन शैली ताई ची सर्कल विशेषज्ञ हैं, उन्होंने अष्टांग योग का अभ्यास कराया। रेडियंट बॉडी योग के संस्थापक किआ मिलर ने कुंडलिनी योग, कोटद्वार में कन्व आश्रम के प्रमुख योगिराज स्वामी जयंत सरस्वती ने पावर योग का अभ्यास कराया।
सात्विक नाश्ते के पश्चात, प्रतिभागियों ने योगाचार्य केटी बी हैप्पी के साथ ’अपने वास्तविक उद्देश्य को खोजना’ सत्र आनंद लिया। सत्व योग अकादमी के संस्थापक योगाचार्य आनंद मेहरोत्रा ने ‘कॉस्मिक हार्ट/कॉस्मिक प्राण’ सत्र का अभ्यास कराया। सेक्रेड साउंड स्टेज पर, तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त संगीतकारों ने विशेष प्रस्तुति दी। संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सास की डाफ्ने त्से ने ’तरंग, कंपन और ऊर्जा’ सत्र के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोपहर के सत्र में, चीन के सबसे प्रतिष्ठित योग विद्यालय, योगीयोग के संस्थापक और निदेशक, योगाचार्य मोहन भंडारी ने एक विशेष ध्यान कराया। उरुग्वे की एक आयुर्वेदिक चिकित्सक मारिया एलेजांद्रा अवचरियन ने योगियों को मन को संतुलित करना सिखाया। वेदांत विशेषज्ञ गायत्री योगाचार्य ने वेदांत की मौलिक अवधारणाओं की विशेष जानकारी प्रदान की। सेक्रेड साउंड स्टेज पर, प्रतिभागियों ने संजय हॉल के साथ रिस्टोरेटिव साउंड बाथ का आनंद लिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रिकॉर्डिंग कलाकार डाफ्ने त्से ने कहा, ’मैं परमार्थ निकेतन आकर विश्व के अनेक देशों से आए लोगों से अद्भुत जुड़ाव महसूस करती हूँ जो मुझे सबसे ज्यादा उत्साहित भी करता है। दुनिया भर से योगी यहां माँ गंगा के तट पर आकर आपसी प्रेम को बढ़ाने और योग व ध्यान के लिए दूसरों को प्रेरित करने के लिए आते हैं। यह आकर लग रहा है जैसे जीवन पूरी तरह से बदल गया है। जीवन हल्का हो गया है। योगाचार्य गुरमुख कौर खालसा ने कहा कि मैं अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में विगत 24 वर्षो से शामिल हो रही हूँ। इन 24 वर्षों में योग महोत्सव में क्या बदलाव आया है, इस पर उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव ने अत्यधिक विकसित स्वरूप धारण कर लिया है। अब यह दुनिया का सबसे शानदार योग महोत्सव बन गया है। जो यहां आने वाले सभी के लिए उनके यादगार महोत्सव में से एक है।

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