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मुख्यमंत्री ने नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का किया वर्चुअली शुभारंभ

देहरादून ( राव शहजाद ) । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुड़की स्थित कोर यूनविर्सिटी में आयोजित नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का वर्चुअली शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में भारत के खेल इतिहास में अभूतपूर्व बदलाव आया है । यह दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो हर बाधा को चुनौती में और हर चुनौती को अवसर में बदल देती है। उन्होंने कहा कि पावरलिफ्टिंग अपने आप में अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है । ये खेल केवल ताकत ही नहीं, बल्कि हौंसले और आत्मसम्मान की अद्वितीय मिसाल है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत के दिव्यांग भाई-बहन, आज प्रत्येक क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर ने 1972 के ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। इसी क्रम में सत्येंद्र सिंह लोहिया पहले ऐसे भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी बने, जिन्होंने 12 घंटे में इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया। भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने दोनों हाथ न होने के बावजूद विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर ये साबित कर दिया कि कमजोरी को किस प्रकार अपनी ताकत बनाया जाता है। इसी तरह दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम ने कोलंबों में टी-20 ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट वर्ल्ड कप-2025 जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने समारोह में उपस्थित पद्मश्री डॉ दीपा मलिक का उल्लेख करते हुए कहा कि आप भारत की पहली महिला पैरालंपिक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2016 के रियो पैरालंपिक की शॉटपुट प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। इसके अलावा आप एक सफल बाइकर, तैराक और कार रैली चालक भी हैं, आपका पूरा सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बीते एक दशक में भारत के खेल इतिहास में अभूतपूर्व बदलाव आया है । यह दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अपनी सीमाओं को तोड़ते हुए दुनिया को दिखाया है कि भारत अब केवल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाला देश नहीं रह गया है, आज का “नया भारत” मुकाबला जीतने के लिए खेलता है। इस परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट सोच और मजबूत नीति रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का खेलों के प्रति प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके नेतृत्व में भारत का खेल बजट पहले के मुकाबले तीन गुणा बढ़ चुका है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “खेलो इंडिया” मुहिम देश के प्रत्येक हिस्से से विभिन्न खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में कामयाब हो रही है। वहीं इससे देश में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत हो रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पिछले वर्ष हमारे राज्य में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन ने उत्तराखण्ड को “देवभूमि’’ के साथ – साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर 7वां स्थान प्राप्त किया। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रयास कर रही है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तराखण्ड केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने में भी सक्षम बन सका है।

मौके पर खेल रत्न पद्श्री डॉ दीपा मलिक, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावर लिफ्टिंग के चेयरपर्सन जेपी सिंह, पैरा राव लिफ्टिंग के उपाध्यक्ष शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन, पैरालंपिक पावर लिफ्टर परमजीत कुमार, अशोक, कस्तूरी उपस्थित थे।

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