Blog

केवट लीला, दशरथ मरण एवं भरत मिलाप के मंचन को देख भावुक हुए श्रद्धालु

मुख्य अतिथि के रूप में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने की शिरकत

रायवाला । रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्री रामलीला महोत्सव में सोमवार को केवट लीला, सीता व्याकुलता, सुमंत वापसी, दशरथ मरण एवं भरत मिलाप सहित पांच प्रमुख प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। इन मार्मिक प्रसंगों को देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच संचालक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि सोमवार की लीला में भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के वनगमन से लेकर भरत मिलाप तक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के प्रथम प्रसंग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात राजा निषादराज से होती है। गंगा पार जाने के लिए भगवान श्रीराम केवट को बुलाते हैं, लेकिन केवट उन्हें अपनी नाव में बैठाने से पहले उनके चरण पखारने की शर्त रखता है। केवट कहता है कि भगवान श्रीराम के चरणों के स्पर्श से पत्थर की शिला नारी बन गई थी, ऐसे में यदि उनके चरण नाव में पड़ गए तो न जाने क्या हो जाए। भगवान श्रीराम के चरण धोने के बाद केवट उन्हें गंगा पार उतार देता है।

इसके बाद सीता व्याकुलता और सुमंत वापसी के प्रसंगों का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के वन से वापस न लौटने की चिंता में महाराज दशरथ अत्यंत व्याकुल हो जाते हैं और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। वहीं, ननिहाल से लौटने पर भरत को श्रीराम के वनवास और पिता महाराज दशरथ की मृत्यु का समाचार मिलता है। यह सुनकर भरत अत्यंत दुखी और क्रोधित हो जाते हैं। माता कैकेयी से घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर वे उनके निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हैं। इसके बाद भरत माता कौशल्या से क्षमा याचना करते हुए भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने का संकल्प लेते हैं। गुरु वशिष्ठ के साथ विचार-विमर्श के बाद भरत और शत्रुघ्न चित्रकूट पहुंचते हैं, जहां भगवान श्रीराम और भरत का भावुक मिलाप होता है। भरत उन्हें अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, लेकिन पिता के वचनों का पालन करने के लिए भगवान श्रीराम वनवास पूरा करने पर अडिग रहते हैं। अंततः भरत भगवान श्रीराम की खड़ाऊं अपने सिर पर धारण कर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं। इस मार्मिक प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका सौरभ चमोली, लक्ष्मण की चन्द्रमणि शर्मा, भरत की विजय शर्मा, शत्रुघ्न की सन्नी, माता सीता की प्रिन्स, राजा दशरथ की प्रदीप अरोड़ा, कैकेयी की राहुल, माता कौशल्या की समर, सुमित्रा की अंश, गुरु वशिष्ठ की भगत सिंह, मंथरा की आयुष जोशी, सुमंत की सूरज चमोली, राजा निषादराज गुह की गोपाल दत्त सेमवाल, केवट की त्रिलोक सिंह तथा केवट के साथी की भूमिका उत्तम सिंह ने निभाई। द्वारपाल की भूमिका तीरथ सिंह ने निभाई, जबकि खुशी ने भी अपनी भूमिका से योगदान दिया। सभी कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों की खूब प्रशंसा प्राप्त की। विशेष रूप से सुमंत की भूमिका निभाने वाले सूरज चमोली के अभिनय की सराहना की गई। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल उपस्थित रहीं।

मौके

पर ग्राम सभा प्रतीत नगर के ग्राम प्रधान राजेश जुगलान सहित उप प्रधान ओर पंचायत सदस्य, राधा कृष्ण कीर्तन मंडली, प्रतीत नगर; विंध्यावासिनी कीर्तन मंडली, गौहरीमाफी; जिला पंचायत सदस्य हरिपुर कलां दिव्या बेलवाल; अंजलि रावत नैथानी तथा होशियारी माता मंदिर कीर्तन मंडली सहित आमंत्रित अतिथियों को लोक कल्याण समिति की ओर से रामदरबार की माला एवं रामदरबार का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों रामभक्तों ने रामलीला का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

[banner id="1202"]

Related Articles

Back to top button