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इंदिरा गांधी से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक, देशहित में आर्थिक अनुशासन और संतुलित निवेश पर दिया जाता रहा है जोर : खुराना

ऋषिकेश। एमकॉम एवं एम.ए. (अर्थशास्त्र) की उपाधि प्राप्त, साहित्यकार एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों में मीडिया सलाहकार के रूप में नि:शुल्क सेवाएं दे रहे शिक्षक नरेन्द्र खुराना ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समय-समय पर देशहित, आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर नागरिकों को जागरूक करने का कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से सोने की अनावश्यक खरीद में संयम तथा संतुलित निवेश की भावना देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।नरेन्द्र खुराना ने कहा कि वर्ष 1960 के दशक में विदेशी मुद्रा संकट के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रा गांधी द्वारा भी नागरिकों से सोने की खरीद में संयम रखने एवं राष्ट्रीय आर्थिक अनुशासन का पालन करने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय देश की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा बचाना राष्ट्रीय प्राथमिकता माना गया था। उन्होंने कहा कि आज भी भारत में बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। यदि नागरिक आवश्यकता और संतुलन के आधार पर निवेश करें तथा अपनी बचत का कुछ भाग उद्योग, बैंकिंग, शिक्षा, व्यवसाय एवं अन्य उत्पादक क्षेत्रों में लगाएं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है तथा आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को बल मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में सोने का विशेष धार्मिक, सामाजिक एवं पारंपरिक महत्व है और उनका उद्देश्य किसी परंपरा का विरोध नहीं, बल्कि आर्थिक जागरूकता के दृष्टिकोण से जानकारी साझा करना है।

उन्होंने कहा कि संतुलित निवेश, आर्थिक अनुशासन एवं देशहित की भावना के साथ लिए गए निर्णय राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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